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रिश्तों का मवाद

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चरमराती चारपाई पर ; दमकती साँसों के बीच ; पसीने की भभकन ; वहाँ ना कोई अहं ; ना ही कोई शरम ; नग्नता भरा सच ; प्रोफेसनल सिसकारियों के ; क्षणिक आनंद की प्राप्ति ; संतुष्टि एक रात की ; जो सुबह ना कही जा सके ; कुछ ऐसी बात की ; उठना और फिर ; झटके से मुँह फेर लेना ; लाख दरजे बेहतर है यह ; आला रिश्तों की चाशनी में लिपटी ; अनबूझ आकांक्षाओं से ; अगर डूबना चाहोगे ; शांति की तलाश में ; मिलेगा सिर्फ अवसाद ; साफ करते करते थक जाओगे ; इन पाकीजा रिश्तों का मवाद ;