संदेश

फ़रवरी, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"परमेश्वर"

आज परमेश्वर ने ; रोज से कुछ ज्यादा ही ; पी रखी थी कच्ची ; अपने ही नशे में चूर ; मरगिल्ला सा ; डेड़ पसली बदन ; लहरा रहा था ; सड़क पे ; खट् खट् खट् ; किवाड़ खुले ; बच्चे को कैंया टाँगे ; सुलाने ...