"थोड़ा नशा" [POETRY]
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
उंगलियों की पोरों में ;
उलझती वो लटें ;
तेरी आँखों की चाँदनी से ;
कुछ क़रार आ गया था ;
तितली से फड़फड़ाते ;
उन लबों को चूम लूँ ;
दिल में कुछ ऐसा ;
ख़्याल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
माथे से बहता पसीना ;
लगता था जैसे ;
बूँदें हों शबनमी ग़ुलाब पर ;
दिल की तन्हा गलियों में मानो ;
एक बवाल आ गया था ;
खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी बेकसी ;
फिर सामने एक नया सवाल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
हम तुम बैठे थे रूबरू ;
कुछ बोलने की चाहत ना थी ;
दिल हो गया था बेईमान ;
कुछ ऐसा मलाल आ गया था ;
तेरे अँगूठे से कुरेदी गई ;
वो ज़मीन बना रही थी ;
तस्वीर तेरे इक़रार की ;
टूटने को थीं अब सारी हदें ;
तुझे पा लेने का ख़्याल अब ;
हर हाल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
उंगलियों की पोरों में ;
उलझती वो लटें ;
तेरी आँखों की चाँदनी से ;
कुछ क़रार आ गया था ;
तितली से फड़फड़ाते ;
उन लबों को चूम लूँ ;
दिल में कुछ ऐसा ;
ख़्याल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
माथे से बहता पसीना ;
लगता था जैसे ;
बूँदें हों शबनमी ग़ुलाब पर ;
दिल की तन्हा गलियों में मानो ;
एक बवाल आ गया था ;
खत्म होने का नाम नहीं ले रही थी बेकसी ;
फिर सामने एक नया सवाल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
हम तुम बैठे थे रूबरू ;
कुछ बोलने की चाहत ना थी ;
दिल हो गया था बेईमान ;
कुछ ऐसा मलाल आ गया था ;
तेरे अँगूठे से कुरेदी गई ;
वो ज़मीन बना रही थी ;
तस्वीर तेरे इक़रार की ;
टूटने को थीं अब सारी हदें ;
तुझे पा लेने का ख़्याल अब ;
हर हाल आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
मुझे थोड़ा-थोड़ा नशा तो आ गया था ;
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