पथरीला आसन
आओ फूलों ;
मैं तुम्हें बताऊँ ;
करामातें पत्थरों की ;
कुछ बातें सिरफिरों की ;
कब्र में पाँव लटकाये ;
यौवन पे आँखें जमाये ;
दाढ़ी की सफेदी का ;
मखौल बनाते हुये ;
इन्होंने लाखों कमाये ;
पैरों पर रखे कुछ ;
,भक्ति से भरे कोमल हाथ ;
इनके बदन में ;
सिहरन दौड़ाते होंगे ;
सदा जवान बने रहने के ;
कुछ अचूक नुस्खे सुझाते होंगे ;
मैं सिहर उठता हूँ ;
उस दृश्य की ;
कल्पना से भी ;
जब मुख पर ;
होता होगा राम नाम ;
और आँखों के लाल डोरे ;
पल्लुओं का नाप बताते होंगे ;
मन में कुत्सित इरादे लिये ;
आत्मा में भरा हलाहल लिये ;
ये विषधर नाग ;
भोली आस्थाओं का मजाक ;
कैसे उड़ाते होंगे ;
चलो थोड़ा सबक तो ;
अब मिल गया है ;
नरम गद्दियों वाला सिंहासन अब जो ;
पथरीले आसन में बदल गया है ;
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