मुझे क्यों मारा ?
मैं देहाड़ीछाप मजदूर ;
देश का बोझ अपने कंधों पर ;
ढो-ढोकर घिसटनेवाला ;
पेट्रोल महँगा हो या सस्ता ;
यात्रा हो या ना हो ;
मोदी आये या राहुल ;
कौन है आसाराम ;
और कहाँ का शोभन ;
मुझे क्या मालूम ;
मेरा भगवान मेरी रोटी में बसता है ;
रात को बदन तोड़कर घर पहुँचता हूँ ;
तब मेरे बच्चों का पेट भरता है ;
ओ दंगाईयों मुझे क्यों मार डाला ;
मैंने क्या किया था ;
मुझे कुछ लेना-देना नहीं था ;
तुम्हारे धर्म से ;
तुम्हारी राजनीति से ;
मेरे पास तो सिर्फ रोटियाँ थीं ;
मुझे जल्दी थी घर जाने की ;
बच्चे बिलख रहे थे भूख से ;
बीबी दिलासा दे रही थी कि ;
पापा आयेंगे खाना लायेंगे ;
और तुमने मुझे मार डाला ;
मेरी लाश को पैरों तले रौंदकर निकल गये ;
हाँ मैं नहीं था कुछ भी ;
पर मेरे परिवार की एक वक़्त की ;
रोटी का आसरा तो था ;
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