"बूढ़े का पाइप"

उस बूढ़े के हाथ में रखा ;
एक पाइप का टुकड़ा ;
मुझे खींचता था उसकी ओर ;
उकड़ू बैठा वो कभी ;
कुरेदता था जमीन को पाइप से ;
कभी आँखों में ;
दूरबीन सा लगा लेता था ;
गोपन की तरह घुमाता था ;
बेटा बहू पोता अलग रहते थे ;
उनके बाजू के कमरे में ही ;
वो रहता था अकेला ;
लोग समझते थे ;
दुख में पगला गया है ;

पर मेरा कौतूहल तो ;
उस पाइप को लेके था ;
कोशिश कर रहा था मैं ;
जानने को उस पाइप का राज ;
एक दिन मैंने देखा ;
अपने पलंग पे बैठा बूढ़ा ;
पाइप कान में लगाये है ;
पाइप का एक हिस्सा खुंसा था ;
खिड़की के एक कोने में ;
मैंने पूछा तो बताया उसने ;
इस पाइप से खिड़की के उस ओर ;
खेलते उसके पोते की आवाज ;
साफ सुनाई देती है ;
वो उसे खिला नहीं पाता गोद में ;
उसके गालों को चूम नहीं सकता ;
बिखरे बालों पे हाथ नहीं फेर सकता ;
तो बस इस पाइप से सुनता है ;
उसकी आवाज ;

मुझे उस बूढ़े के दिल का दर्द ;
और पाइप से मोहब्बत ;
समझ आ गई थी ;

पागल नहीं था वो ;

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