एक बच्चा, कब्र पर बैठा, मुस्कुरा रहा था, हाथ में रोटी का टुकड़ा लिये, उसे खा रहा थाl कभी वो मचलता था, कभी इठलाता था, कभी चारों ओर चक्कर लगाता था, थक जाता तो कब्र से लिपटता, सुस्ताता, और फिर शुरू हो जाताl वो सोच रहा था, अब उसे कोई रोक लेगा, प्यार भरी चपत लगा, भींच लेगा, उसके माथे को चूमेगा, गालों को सहलायेगा, उसके पसीने को पोंछ देगा, पर ऐसा कुछ नहीं हुआl वो घने बालों से ढँकी छाती, दफ्न थी वहाँ, नरम तकिया समझ, सोया करता था वो जहाँ, वो मजबूत कंधे, दफ्न थे वहाँ, जो उछाल दिया करते थे, उसे हवा मेंl अपने घुटनों में मुँह छुपा, बैठा था वो, कुछ सोचते हुये, कुछ पत्थर, पैरों को घायल कर गये थे, कुछ काँटे, चुभ गये थे, धूल भर गयी थी, आँखों मेंl फिर उसने कब्र की ओर देखा, मुस्कुराया, और फिर दौड़ना शुरू कर दिया, वो छाती, वो कंधे, भी तो यही चाहते थे, शाय...
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