"तू और मैं"
लब जो कह नहीं सकते ;
ख़ामोशी कह जाती है ;
तेरी ख़ामोशी की हर एक बात ;
हमें समझ आ जाती है ;
तेरे इसी अंदाज ने तो ;
दीवाना कर दिया है ;
तुझे शमा और मुझे ;
परवाना कर दिया है ;
शमा तो रोशन है ;
परवाने के लिये ;
तो फिर तू जो हुक्म दे ;
इस दीवाने के लिये ;
दीवाने की दीवानगी क़ुबूल है हमें ;
ग़र ज़िंदगी भर का साथ हो ;
यह ज़िंदगी क़ुबूल है हमें ;
ग़र हर जगह आप हो ;
ज़मीं से आसमाँ तक का साथ है ;
बस यूँ ही पुकार लेना ;
सुबह हो जायेगी यूँ ही बात करते करते ;
अब तुम जरा अपनी पलकों को लगा लेना ;
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