SHORT STORY - मूँगफली
..सोहागपुर जाना था..भोपाल के नये बस अड्डे पर बस भी मिल गयी थी..और खुदा का शुक्र है..जगह भी मिल गई..वो भी विंडो पे..वाह..
..मूँमफल्लये.....आवाज आई..बहुत जानी पहचानी आवाज थी ये..सोहागपुर कॉलेज में साइंस नहीं था..अपडाउन करता था इटारसी..मैं बीएससी कर रहा था..तब वो एमए कर था..दौलत..हाँ दौलत नाम था उसका..ट्रेन में मूँगफली बेचता था..फिर स्टेशन पे झोला पटक कर..उसी में से किताबें निकाल कर..कॉलेज पहुँच जाता था वो..कई बार फ्री मूँगफली खाई थीं उससे..वो आवाज याद थी..
..आज फिर वो सामने था..मूँगफली का पैकेट हाथ में रख दिया..पैसे फिर नहीं लिये..और मुस्कुराते हुआ शान से बोला..भाईजान अब यहाँ परमानेंट ठेला डाल लिया है अपन ने..वाह भाई दौलत..तेरी दौलत का भी क्या कहना..कौन कहता है मेहनत से सब कुछ मिला जाता है..पर क्या पता उसे मिल गया हो..
..अपन को क्या मालुम ?..
..मूँमफल्लये.....आवाज आई..बहुत जानी पहचानी आवाज थी ये..सोहागपुर कॉलेज में साइंस नहीं था..अपडाउन करता था इटारसी..मैं बीएससी कर रहा था..तब वो एमए कर था..दौलत..हाँ दौलत नाम था उसका..ट्रेन में मूँगफली बेचता था..फिर स्टेशन पे झोला पटक कर..उसी में से किताबें निकाल कर..कॉलेज पहुँच जाता था वो..कई बार फ्री मूँगफली खाई थीं उससे..वो आवाज याद थी..
..आज फिर वो सामने था..मूँगफली का पैकेट हाथ में रख दिया..पैसे फिर नहीं लिये..और मुस्कुराते हुआ शान से बोला..भाईजान अब यहाँ परमानेंट ठेला डाल लिया है अपन ने..वाह भाई दौलत..तेरी दौलत का भी क्या कहना..कौन कहता है मेहनत से सब कुछ मिला जाता है..पर क्या पता उसे मिल गया हो..
..अपन को क्या मालुम ?..

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