COLLECTION - यात्रा POEM - सूखे पत्ते

सूखे पत्तों पे चलना हो तो ;
बेआवाज़ कैसे चलें ;

पैरों तलों कुचले जाने की ;
आवाज़ तो आयेगी ;
उस हरियाले रास्ते की ;
याद तो आयेगी ;
वो विशिष्ट हैं या अपशिष्ट ;
सरल हैं या फिर हैं क्लिष्ट ;
समझना मुश्किल ;
होश-ओ-गुमान से बाहर ;

सूखे पत्तों पे चलना हो तो ;
बेआवाज़ कैसे चलें ;

नंगे पैर खाली हाथ ;
ज़ुबान सूखी हुई ;
गर्म हवाओं की दहशत ;
सीधी धूप की वहशत ;
उस कसैली सी बू के दरम्यान ;
उस ख़ुश्बू की याद सता रही थी ;

सूखे पत्तों पे चलना हो तो ;
बेआवाज़ कैसे चलें ;

चलो चलें तो ;
देखते हैं क्या होगा ;
अच्छा होगा या बुरा होगा ;
थकान थी ;
अब मुस्कान भी दर्द पहुँचा रही थी ;
चलते-चलते रुक जाना ही बेहतर समझा ;
घुटने टेक दिये ;
पत्तों की आवाज़ फिर भी आई ;

सूखे पत्तों पे चलना हो तो ;
बेआवाज़ कैसे चलें ;

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