COLLECTION : 'यात्रा' POEM : 'एक'

'अनेक' की चाहत नहीँ मुझे,
वो 'एक' कब मिलेगा ?
उस 'एक' की तलाश थी,
उस 'एक' की तलाश है,
उस 'एक' की तलाश रहेगी,
उस 'एक' की तलाश मेँ,
'अनेक' मिलते चले गये,
'अनेक' की चाहत नहीँ मुझे,
वो 'एक' कब मिलेगा ?
शून्य कहूँ इसे,
या कहूँ अशून्य,
प्रखर कहूँ इसे,
या कहूँ इसे मौन,
गिनती गिन रहा हूँ,
पर वो 'एक' नहीँ मिलता,
प्रतीक्षा कर रहा हूँ,
पर संदेश नहीँ मिलता,
'अनेक' की चाहत नहीँ मुझे,
वो 'एक' कब मिलेगा ?
मैँ नहीँ चाहता,
इस भीड़ को,
शरीर है पर,
खोज रहा हूँ रीढ़ को,
वो एक कहाँ होगा,
वो एक कैसा होगा,
सोच रहा हुँ बस,
'अनेक' की चाहत नहीँ मुझे,
वो 'एक' कब मिलेगा ?

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