"अद्वितीय सोहागपुर" [POETRY]
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
आरंभ हुई इतिहास यात्रा,
शौणितपुर के नाम से,
सौभाग्यपुर से गुजरी नामावली,
पहुँची सुहागपुर धाम से,
यह है वो नगर जिसे आज,
सोहागपुर पुकारा जाता है,
गौरवशाली इतिहास की,
यहाँ भी एक क्यारी है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
राजधानी से प्रवेशित द्वार पर,
मढ़ई मुकुट इठलाता है,
रमणीक दृश्यों और चंचल देनवा की,
अद्भुत कथा सुनाता है,
भाईचारे की खुश्बू यहाँ,
रग-रग में पलती है,
हनुमान नाके और ख़्वाज़ा पीर पर,
गंगा-जमुनी तहज़ीब झलकती है,
बुद्ध प्रतिमा भी यहाँ विराजमान है,
हर धर्म का यहाँ पूरा सम्मान है,
कुटिल चालें हर बार,
यहाँ से हारी हैं,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
शिव भक्त वाणासुर की,
यह नगरी कहलाती,
वाणासुर को हुई थी,
श्रीकृष्ण के हाथों मोक्ष प्राप्ति,
समस्त पवित्र नदियों का,
जल जिसमें समाहित है,
वह पवित्र कुण्ड जमनी सरोवर,
यहाँ सोहागपुर में स्थित है,
वाणासुर पुत्री ऊषा,
करती थी स्नान यहाँ,
अनेकों अन्य तथ्य अति मनोहारी हैं,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
पलक में आती पलक में जाती,
पलकमती यहाँ की प्रमुख नदी कहलाती,
कभी सौम्य तो कभी,
विकराल रूप इसका दिखता है,
पलकमती और पावन नर्मदा का,
अद्भुत संगम भी यहाँ मिलता है,
सोहागपुरी पान जगप्रसिद्ध,
सुराही श्रेष्ठ कहलाती है,
फसलों का अंबार यहाँ,
माया यहाँ की अज़ब निराली है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
सिद्ध बाबा भी हैं यहाँ विराजे,
दादा पीर के जलवे भी यहाँ साजे,
जैन मंदिर यहाँ और है गिरिजाघर,
स्वयं गुरुनानक के चरण पड़े जहाँ,
वो नानक टेकरी भी है यहाँ पर,
सर्वधर्मसमभाव हर दिल में यहाँ सजता है,
हर गुरुवार करनपुर में,
हज़रत का अद्भुत दरबार लगता है,
खुशी अपनी और ग़मी यहाँ से न्यारी है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
महाशिवरात्रि पर्व पर,
यहाँ पावन मेला लगता है,
डोल ग्यारस के प्रसिद्ध पर्व का,
जश्न भी यहाँ सजता है,
इतिहास गाथा सुनाता कमानिया गेट,
सिर उठाये खड़ा है,
स्वयं महात्मा गाँधी पधारे जहाँ,
वो गाँधी चौक भी यहाँ बना है,
स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति भी,
नगर इतिहास में समाहित है,
शिक्षा की अभिनव लौ भी,
पूर्ण रूप से प्रज्वलित है,
कोई पतझड़ नहीं यहाँ,
हरियाली ही हरियाली है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
आरंभ हुई इतिहास यात्रा,
शौणितपुर के नाम से,
सौभाग्यपुर से गुजरी नामावली,
पहुँची सुहागपुर धाम से,
यह है वो नगर जिसे आज,
सोहागपुर पुकारा जाता है,
गौरवशाली इतिहास की,
यहाँ भी एक क्यारी है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
राजधानी से प्रवेशित द्वार पर,
मढ़ई मुकुट इठलाता है,
रमणीक दृश्यों और चंचल देनवा की,
अद्भुत कथा सुनाता है,
भाईचारे की खुश्बू यहाँ,
रग-रग में पलती है,
हनुमान नाके और ख़्वाज़ा पीर पर,
गंगा-जमुनी तहज़ीब झलकती है,
बुद्ध प्रतिमा भी यहाँ विराजमान है,
हर धर्म का यहाँ पूरा सम्मान है,
कुटिल चालें हर बार,
यहाँ से हारी हैं,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
शिव भक्त वाणासुर की,
यह नगरी कहलाती,
वाणासुर को हुई थी,
श्रीकृष्ण के हाथों मोक्ष प्राप्ति,
समस्त पवित्र नदियों का,
जल जिसमें समाहित है,
वह पवित्र कुण्ड जमनी सरोवर,
यहाँ सोहागपुर में स्थित है,
वाणासुर पुत्री ऊषा,
करती थी स्नान यहाँ,
अनेकों अन्य तथ्य अति मनोहारी हैं,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
पलक में आती पलक में जाती,
पलकमती यहाँ की प्रमुख नदी कहलाती,
कभी सौम्य तो कभी,
विकराल रूप इसका दिखता है,
पलकमती और पावन नर्मदा का,
अद्भुत संगम भी यहाँ मिलता है,
सोहागपुरी पान जगप्रसिद्ध,
सुराही श्रेष्ठ कहलाती है,
फसलों का अंबार यहाँ,
माया यहाँ की अज़ब निराली है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
सिद्ध बाबा भी हैं यहाँ विराजे,
दादा पीर के जलवे भी यहाँ साजे,
जैन मंदिर यहाँ और है गिरिजाघर,
स्वयं गुरुनानक के चरण पड़े जहाँ,
वो नानक टेकरी भी है यहाँ पर,
सर्वधर्मसमभाव हर दिल में यहाँ सजता है,
हर गुरुवार करनपुर में,
हज़रत का अद्भुत दरबार लगता है,
खुशी अपनी और ग़मी यहाँ से न्यारी है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
महाशिवरात्रि पर्व पर,
यहाँ पावन मेला लगता है,
डोल ग्यारस के प्रसिद्ध पर्व का,
जश्न भी यहाँ सजता है,
इतिहास गाथा सुनाता कमानिया गेट,
सिर उठाये खड़ा है,
स्वयं महात्मा गाँधी पधारे जहाँ,
वो गाँधी चौक भी यहाँ बना है,
स्वतंत्रता संग्राम की क्रांति भी,
नगर इतिहास में समाहित है,
शिक्षा की अभिनव लौ भी,
पूर्ण रूप से प्रज्वलित है,
कोई पतझड़ नहीं यहाँ,
हरियाली ही हरियाली है,
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll
मेरे सोहागपुर की बलिहारी है ll

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