COLLECTION - यात्रा POEM - बोझ

वो बस अपनी ही सुनाता चला गया ;

सुलझनों को उलझाता चला गया ;

अपने ही दिल की बताता चला गया ;

दिल हमारे पास भी था ;
खाली नहीं अरमानों से भरा हुआ ;
मुस्कुराते होठों के पीछे भी दर्द छुपा होता है ;
इस दर्द को समझने की कोशिश ही नहीं की उसने ;
वो बस अपना ही गीत गाता चला गया ;

कोई बड़ी उम्मीद नहीं थी हमको ;
ना कोई आला सोच जन्मती थी ;
कोशिश थी कि हम खुश रहें वो खुश रहे ;
और वो बेउरमती करता चला गया ;

हमारे सवाल के जबाब का इंतजार कर रहे थे हम तो ;
और वो शर्तें सुनाता चला गया ;

हम फूलों की बात करते रहे ;
और वो काँटों में उलझाता चला गया ;

जिन वहशियों से पाला पड़ा था उसका ;
उनके साथ हमारी गिनती लगाता चला गया ;

हम पास जाते रहे खुद ही बेशर्म बनकर ;
और वो दूर जाता चला गया ;

सुकून की कोशिश हमारी आखिरी पल तक थी ;
पर बस वो तो सताता चला गया ;

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

"परमेश्वर"

COLLECTION - यात्रा POEM - दफ्न

"बूढ़े का पाइप"