COLLECTION - यात्रा POEM - हम कहाँ हैं

वो उलझन,
वो सुलझन,
वो हमारी नादानियाँ,
वो उसकी बेपरवाहियाँ,
वो हमारी गुस्ताखियाँ,
वो उसकी आवाज का रूखापन,
वो हमारा बचकानापन,
वो उसकी ऑफिसियल हँसी,
वो हमारी पर्सनल खुशी,
कहाँ ले आया हमें यह,
कैसा अजीब रास्ता है,
उसकी जिंदगी,
उसकी खुशी,
उसका गम,
उसका फैसला,
उसकी परिभाषायें,
उसका दुख,
उसका सुख,
हम कहाँ हैं,
क्या कर रहे हैं वहाँ,
ना पहुँच पाने वाले गोल की तरह,
सिर्फ एक पोल की तरह,
जज्बातों के एक ब्रोकर की तरह,
बादशाह रानी के बीच एक जोकर की तरह,
बस लग गई जो,
एक ठोकर की तरह,
सब कुछ उसका,
हम हल्के तो वो भारी,
वो भारी तो हम हल्के,
कभी ईमान तो कभी दिल ढुलके,
चलो एक बार तो देखें अब हम खुद चलकेl

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