COLLECTION : `यात्रा` POEM : `वो दिन`

वो दिन भी क्या दिन थेl

वो माँ का आँचल,
वो पिता की सुरक्षा भरी गोद,
वो दादी की कहानियाँ,
वो दादा की अँगुली पकड़कर घूमना,
खुशियाँ दामन चूमती थीं मेरा,

वो दिन भी क्या दिन थेl

फिर लोग समझदार होने लगे,
माँ बाप बोझ लगने लगे,
अति महत्वकांक्षी हम होने लगे,
मैं कहाँ जाऊँ,
किसको बताऊँ,
अपने दिल की बात,
कोई सुनता नहीं,
कोई मिलता नहीं,
मुझे माफ करना परमात्मा,
तेरी इच्छा के विरुद्ध ही,
तेरी शरण में आ रहा हूँ मैं,

वो दिन भी क्या दिन थेl

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